आश्रम : श्री कमल दास कुटिया ट्रस्ट (रजि.) — सप्तऋषि–भूपतवाला, हरिद्वार — माँ गंगा के पावन तट पर संत सेवा, साधना, अन्नदान और मानव कल्याण का जीवंत केंद्र।
118 वर्षों की गौरवशाली आध्यात्मिक धरोहर — यह आश्रम संत सेवा, साधना और अन्नदान का केंद्र रहा है। परम पूज्य महंत श्री कमल दास महाराज जी (जन्म 1850, नेत्रहीन परंतु दिव्य दृष्टि) ने वर्ष 1880 में इस तपोभूमि की स्थापना की।
"धर्म की रक्षा केवल शास्त्रों से नहीं, बल्कि धर्मस्थलों और संत परंपराओं के संरक्षण से भी होती है।"
वर्ष 1908 में महंत आदित्य प्रकाश जी के साथ मिलकर ~350 कमरों वाला विशाल आश्रम बना। तत्कालीन शासक महाराजा सर भूपिंदर सिंह द्वारा 100 बीघा भूमि प्रदान की गई।
परम पिता महंत श्री कमल दास जी
महंत श्री अद्वैत प्रकाश जी
महंत श्री सूतेह प्रकाश जी
वर्तमान महंत ओमप्रकाश शास्त्री जी
प्रतिदिन संध्या आरती, दीप दान, और गंगा मैया का विशेष पूजन।
निरंतर भंडारा, महाप्रसाद वितरण — हर जरूरतमंद को भोजन।
बच्चों को संस्कार, वेद पुराण और नैतिक शिक्षा।
मासिक चिकित्सा शिविर, आयुर्वेद परामर्श व औषधि वितरण।
वेद, पुराण एवं योग पर निःशुल्क कक्षाएँ — संस्कृति संरक्षण।
नियमित ध्यान, प्राणायाम और योग साधना — आत्मिक उन्नति।
गौ माता की सेवा, संरक्षण, भोजन एवं देखभाल के माध्यम से सनातन संस्कृति और मानवता की सेवा।
परम पूज्य महंत श्री कमल दास महाराज (जन्म 1850, ग्राम भरेकां, पंजाब) नेत्रहीन थे, किंतु उनकी आध्यात्मिक दृष्टि अद्भुत थी। 28 वर्ष की आयु में संन्यास लेकर 1880 में हरिद्वार के सप्तऋषि–भूपतवाला में तपोभूमि स्थापित की।
"उस समय न आधुनिक मशीनें थीं, न पर्याप्त धन — फिर भी संतों की तपस्या, श्रद्धालुओं की आस्था और ईश्वर की कृपा से ~350 कमरों का आश्रम खड़ा हुआ।"
तत्कालीन महाराजा सर भूपिंदर सिंह द्वारा 100 बीघा जमीन 50 चांदी के सिक्के सरकारी खजाने में जमा करा कर ली गई। आश्रम में 5 कुओं का निर्माण हुआ, जिससे पूरे क्षेत्र को जल मिला। यह परंपरा आज भी जीवित है।
माँ गंगा के पावन तट पर स्थित श्री कमल दास कुटिया पिछले 118 वर्षों से संत सेवा, साधना, अन्नदान और मानव कल्याण का एक जीवंत केंद्र रही है। इस आश्रम ने न केवल लाखों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान की, बल्कि असंख्य साधु-संतों और यात्रियों के लिए अपना द्वार सदैव खुला रखा।
मात्र 28 वर्ष की आयु में उन्होंने संन्यास ग्रहण किया और वर्ष 1880 में हरिद्वार के सप्तऋषि–भूपतवाला (साधुबेला क्षेत्र) में अपनी तपोभूमि स्थापित की। इसके पश्चात वर्ष 1908 में अपने परम शिष्य महंत श्री आदित्य प्रकाश जी महाराज के साथ मिलकर उन्होंने श्री कमल दास कुटिया का निर्माण कराया।
महाकुंभ, अर्धकुंभ और अन्य धार्मिक अवसरों पर आश्रम ने सदैव मेला प्रशासन का सहयोग किया। यहाँ भोजन-प्रसाद, अन्नक्षेत्र और भंडारा निरंतर चलता रहा। उस समय जब पूरे क्षेत्र में पानी का संकट था, तब आश्रम परिसर में पाँच कुओं का निर्माण कर जनसेवा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया गया।
इस पावन परंपरा को ब्रह्मलीन श्री अद्वैत प्रकाश जी महाराज तथा ब्रह्मलीन श्री सुतेह प्रकाश जी महाराज ने आगे बढ़ाया। वर्ष 1986 में श्री सुतेह प्रकाश जी महाराज के ब्रह्मलीन होने के पश्चात वर्तमान में महंत श्री ओम प्रकाश शास्त्री जी महाराज इस महान धरोहर की सेवा और संरक्षण का दायित्व निभा रहे हैं।
वर्ष 1880 — श्री कमल दास महाराज ने सप्तऋषि क्षेत्र में तपस्या प्रारंभ की।
वर्ष 1908 — ~350 कमरों वाला आश्रम, जो वर्षों तक साधु-संतों की सेवा करता रहा।
हरिद्वार रियासत के महाराजा द्वारा 100 बीघा भूमि संत सेवा के लिए प्रदान।
क्षेत्र में जल संकट के समय आश्रम में 5 कुओं का निर्माण कर जनसेवा का अनोखा उदाहरण।
ब्रह्मलीन श्री अद्वैत प्रकाश, श्री सूतेह प्रकाश से वर्तमान महंत श्री ओम प्रकाश शास्त्री तक अटूट गुरु परंपरा।
आयकर अधिनियम 12A एवं 80G से पंजीकृत, दानदाताओं को कर छूट का लाभ।
समय की मार ने इस 118 वर्ष पुरानी धरोहर को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। आश्रम के अनेक भवन जर्जर हो चुके हैं और तत्काल पुनर्निर्माण की आवश्यकता है।
यदि आज हम सब मिलकर इस धरोहर को नहीं बचाएँगे, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कभी क्षमा नहीं करेंगी।
यह केवल ईंट-पत्थरों का पुनर्निर्माण नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, संत परंपरा, अन्नक्षेत्र और सेवा की अमूल्य विरासत को सुरक्षित रखने का संकल्प है।
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समय की मार ने इस 118 वर्ष पुरानी धरोहर को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। आश्रम के अनेक भवन जर्जर हो चुके हैं और तत्काल पुनर्निर्माण की आवश्यकता है। यह केवल ईंट-पत्थरों का पुनर्निर्माण नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, संत परंपरा और सेवा की अमूल्य विरासत को सुरक्षित रखने का संकल्प है।
"यदि आज हम सब मिलकर इस धरोहर को नहीं बचाएँगे, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कभी क्षमा नहीं करेंगी।"
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📜 श्री कमल दास कुटिया ट्रस्ट (रजि.) आयकर अधिनियम के अंतर्गत 12A एवं 80G से पंजीकृत है। पात्र दानदाताओं को लागू नियमों के अनुसार 80G के अंतर्गत आयकर में छूट का लाभ प्राप्त हो सकता है।
🙏 आश्रम : सप्तऋषि–भूपतवाला, हरिद्वार (उत्तराखण्ड) — गंगा तट पर स्थित यह आध्यात्मिक केंद्र आपकी प्रतीक्षा कर रहा है। सेवा, संस्कृति और समर्पण का संगम।